अशोक स्तंभ का इतिहास और इसके बारे में संपूर्ण जानकारी हिंदी में – Ashoka Stambh History and Information in Hindi

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सम्राट अशोक मौर्य वंश (Maurya Dynasty) का तीसरे शासक थे और प्राचीन काल में भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे शक्तिशाली राजाओं में से एक थे। बौद्ध साहित्य में अशोक एक क्रूर और निर्दयी सम्राट बताया गया है। लेकिन कलिंग के युद्ध के बाद उसने बौद्ध धर्म ग्रहण किया और धर्म के सिद्धांतों के प्रसार के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। बौद्ध में बदलने के बाद, सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म को भारत से अलग अंतरराष्ट्रीय स्थानों में प्रचारित किया। उन्होंने बौद्ध धर्म को प्रसारित करने के लिए अपने बेटे महेंद्र और बेटी संगमित्र को श्रीलंका को भेज दिया।

अशोक ने तीन साल में अस्सी-चार हजार स्तूप का निर्माण किया, और उन्होंने अतिरिक्त रूप से भारत में बहुत से स्थानों में स्तंभ बनाये। इनमें से एक स्तंभ जो सारनाथ में स्थित है, उसको भारत के राष्ट्रीय प्रतीक (National Emblem) के रुप में अपनाया गया है। सारनाथ के स्तंभ को अशोक स्तंभ कहा जाता है। चार शेर सारनाथ में इस स्तंभ के शीर्ष पर बैठते हैं, और सभी के पास एक दूसरे के समीप उनकी पीठ होती है।

भारत ने सारनाथ के अशोक स्तंभ को राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाया है। इसके अलावा, अशोक स्तंभ के निचले हिस्से में चक्र भारतीय तिरंगा के मध्य भाग में रखा गया है। इन स्तंभों में उनकी विशिष्ट मूर्तिकला के परिणामस्वरूप सबसे प्रसिद्ध हो गया। सारनाथ का स्तंभ धर्मचक्र प्रवर्तन की घटना का एक स्मारक था और धर्मसंघ की अक्षुण्णता को बनाए रखने के लिए इसकी स्थापना की गई थी।

कैसे बनाया गया अशोक का स्तंभ – How was the Ashoka Stambh Made In Hindi

सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ लगभग 45 फिट लम्बा है जो चुनार के बलुआ पत्थर से बना है। धरती में गड़े हुए आधार को छोड़कर इसका दंड गोलाकार है, जो नीचे से ऊपर की ओर पतला होता जाता है। दंड के ऊपर इसका कंठ और कंठ के ऊपर शीर्ष है। कंठ के नीचे प्रलंबित दलोंवाला उलटा कमल है। गोलाकार कंठ चक्र से चार भागों में बँटा है और उनमे हाथी, घोड़ा, सांड़ तथा शेर की सजीव प्रतिकृतियाँ उभरी हुई है।

कंठ के ऊपर शीर्ष में चार शेर की मूर्तियां हैं जो पीठ से एक दूसरी से जुड़ी हुई हैं। इन चारों के बीच में एक छोटा दंड है जो 32 तिल्लियों वाले धर्मचक्र को धारण करता है , जो भगवान बुद्ध के 32 महापुरूष लक्षणों के प्रतीक स्वरूप था। अपने मूर्तन और पालिश की दृष्टि से यह स्तंभ अद्भुत है। इस समय स्तंभ का निचला भाग अपने मूल स्थान में है। धर्मचक्र के केवल कुछ ही टुकड़े उपलब्ध हुए।

अशोक स्तम्भ में कितने शेर होते है?- How Many Lions In Ashok Stambh? in Hindi

Ashoka Stambh

प्रारंभ में इसके चार सिंह चारों दिशाओं की ओर मुख करके खड़े हैं। इसके नीचे एक गोल आधार है जिस पर एक हाथी, घोड़ा, एक बैल और एक सिंह बना हुआ है, जो दौड़ते हुए मुद्रा में हैं। यह गोलाकार आधार उल्टे लटके हुए कमल के आकार का है। हर जानवर में एक धर्म चक्र होता है। 

अशोक स्तंभ में शेरों का महत्व – Importance Of Ashok Stambh Lions In Hindi

बौद्ध धर्म में, शेर को बुद्ध का पर्याय माना जाता है। बुद्ध के पर्यायवाची शब्द शाक्यसिंह और नरसिंह हैं। इसका पता हमें पाली कथाओं में मिलता है। इस वजह से, बुद्ध द्वारा दिए गए धम्मचक्कप्पवत्तन सुत्त उपदेश को बुद्ध के सिंह घराने के रूप में संदर्भित किया गया है। इन दहाड़ते शेरों को धम्म चक्कप्पवत्तन के रूप में देखा जाता है।

बुद्ध के ज्ञान प्राप्त करने के बाद, भिक्षुओं ने सभी 4 निर्देशों में चले गए और बहुजन हिताय बहुजन सुखाय को इसिपाटन (मृगदव) में लोक कल्याण के लिए आदेश दिया, जिसे वर्तमान समय में अक्सर सारनाथ कहा जाता है। इसी के चलते यहां मौर्य काल के तीसरे सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के पौत्र चक्रवर्ती अशोक महान ने स्तंभ की चारों दिशाओं में दहाड़ते हुए सिंह का निर्माण कराया था। वर्तमान में इसे अक्सर अशोक स्तंभ कहा जाता है। 

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भारत में अशोक स्तंभ कहां कहां स्थित है – Where Is Ashok Stambh In India In Hindi

जैसा की आप जानते है कि सम्राट अशोक ने भारत के कई हिस्सों में बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए स्तंभों का निर्माण कराया था। और इन स्तंभों पर शिलालेख के रूप में बुद्ध की शिक्षाओं को उकेरा। यहां हम आपको अशोक महान द्वारा बनाए गए प्रमुख स्तंभों में से एक के बारे में बताने जा रहे हैं। 

अशोक स्तंभ सारनाथ – Ashoka Pillar Sarnath In Hindi

सारनाथ में सम्राट अशोक का एक स्तंभ है। जिसे अशोक महान ने 250 ईसा पूर्व में बनवाया था। सारनाथ के स्तंभ का नाम अशोक स्तंभ है। सारनाथ के स्तम्भ के सबसे ऊंचे स्थान पर 4 सिंह विराजमान हैं और सबकी पीठ एक दूसरे से लगी हुई है। भारत ने सारनाथ के अशोक स्तंभ को राष्ट्रव्यापी छवि के रूप में अपनाया है। इसके अतिरिक्त, अशोक स्तंभ के पीछे का चक्र भारतीय तिरंगे के मध्य भाग में स्थित है। आपकी जानकारी में बता दें कि सारनाथ में अशोक स्तम्भ सारनाथ संग्रहालय में सुरक्षित है। अशोक स्तंभ पर तीन लेख लिखे गए हैं जिनमें से पहला अशोक के समय का है और ब्राह्मी लिपि में लिखा गया है। जबकि दूसरा लेख कुषाण काल का और तीसरा लेख गुप्त काल का है। 

अशोक स्तंभ इलाहाबाद – Ashoka Pillar Allahabad In Hindi

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अशोक स्तम्भ, इलाहाबाद, यह स्तम्भ इलाहाबाद किले के बाहर स्थित है। इसका निर्माण 16वीं शताब्दी में सम्राट अकबर ने करवाया था। अशोक स्तंभ के बाहर ब्राह्मी लिपि में अशोक के शिलालेख हैं। समुद्रगुप्त अशोक स्तंभ को 200 ई. में कौशाम्बी से प्रयाग में पेश किया गया था। और उनके दरबारी कवि हरिषन द्वारा रचित प्रयाग-प्रसस्ति उस पर उकेरी गई थी। इसके बाद इलाहाबाद के अशोक स्तम्भ पर 1605 ई. में मुगल बादशाह जहांगीर के सिंहासन पर विराजमान होने की कहानी भी उकेरी जा सकती है। माना जाता है कि इस स्तंभ को 1800 में ध्वस्त कर दिया गया था, हालांकि 1838 में अंग्रेजों ने इसे फिर से खड़ा कर दिया। 

अशोक स्तंभ वैशाली – The Ashoka Pillar Vaishali In Hindi

अशोक स्तंभ वैशाली

शोक स्तम्भ, वैशाली बिहार राज्य के वैशाली में स्थित है। माना जाता है कि सम्राट अशोक को कलिंग विजय के बाद बौद्ध धर्म का अनुयायी बनना पड़ा और वैशाली में अशोक स्तम्भ बनवाया। चूंकि भगवान बुद्ध ने वैशाली में अपना अंतिम उपदेश दिया था, इसलिए यह स्तंभ उनकी एक अंतर्निहित स्मृति थी। वैशाली में अशोक स्तम्भ विपरीत स्तंभों से बिल्कुल अलग है। स्तम्भ के शीर्ष पर एक सिंह का त्रुटिपूर्ण चित्र है जिसका मुख उत्तर दिशा में है। इसे भगवान बुद्ध की अंतिम यात्रा का मार्ग माना जाता है। स्तंभ के बाद एक ईंट का स्तूप और एक तालाब है, जिसे अक्सर रामकुंड कहा जाता है। यह बौद्धों के लिए एक पवित्र स्थान है।

अशोक स्तंभ दिल्ली – The Ashoka Pillar Delhi In Hindi

अशोक स्तंभ दिल्ली

अशोक स्तम्भ, दिल्ली सम्राट अशोक द्वारा निर्मित स्तंभ दिल्ली के फिरोज शाह कोटला में स्थित है। दिल्ली के इस अशोक स्तम्भ का निर्माण भारतीय उपमहाद्वीप में महान सम्राट अशोक ने तीन शताब्दी ईसा पूर्व में करवाया था। यह स्तंभ 13.1 मीटर ऊंचा है और पॉलिश बलुआ पत्थर का उत्पाद है। इसका निर्माण अशोक ने ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में करवाया था। मान्यता है कि पहले यह स्तंभ मेरठ में स्थित था। लेकिन जब फिरोज शाह तुगलक 1364 के आसपास मेरठ आया तो इस स्तम्भ की खूबी से वह मोहित हो गया। इसके बाद उन्होंने मेरठ स्थित इस अशोक स्तम्भ को दिल्ली ले जाकर अपने किले में स्थापित कर लिया। 

अशोक स्तंभ, सांची – Ashok Pillar, Sanchi In Hindi

अशोक स्तंभ, सांची

सारनाथ, इलाहाबाद, वैशाली, दिल्ली के बाद, हम अशोक स्तंभ, सांची के बारे में बात करते हैं। यह स्तंभ मध्य प्रदेश के सांची में स्थित है। इस स्तंभ का निर्माण तीसरी शताब्दी के भीतर किया गया था और इसका निर्माण ग्रीको बौद्ध शैली से प्रभावित है। सांची के पारंपरिक ऐतिहासिक अतीत के अवशेष के रूप में यह स्तंभ आज भी मजबूत बना हुआ है और सदियों पुराना होने के बावजूद यह नवनिर्मित प्रतीत होता है।

इसके अतिरिक्त, यह सारनाथ स्तंभ के समान है। सांची में अशोक स्तम्भ के शीर्ष पर 4 सिंह विराजमान हैं। इसके अलावा, अशोक के स्तंभ निगाली सागर और रुम्मिंडेई, लुंबिनी नेपाल, रामपुरवा और लौरिया नंदनगढ़, चंपारण बिहार, लौरिया अरराज, चंपारण बिहार और अमरावती में भी स्थित हैं। 

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